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फिर कहते हैं कि पटवारी काम नहीं करता

PUBLISHED : Aug 25 , 7:18 PM

 


 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
गिरदावरी एप के १९ कारण
 
 
जिनसे हैं किसान व पटवारी दोनों परेशान

 


किसान हित की बड़ी बड़ी बातें करने वाली सरकार संसाधन उपलब्ध

कराये बगैर कुछ भी काम कराना चाह रही है, वह केवल दिखावे का

कार्य कर रही है। कोई भी योजनाओं में करोडों खर्च करने वाली

सरकार किसानों के काम को गंभीरता से नहीं ले रही है. पटवारियों

को कोई संसाधन ही उपलब्ध नहीं कराये जायेंगे तो वह कैसे काम

करेंगे? पटवारी वर्ग का कहना है कि भू अभिलेखों का

कम्प्यूटरीकरण करना ऑनलाइन प्रक्रिया करने के हम पटवारी भी

पक्षधर हैं, लेकिन ठीक से व्यवस्था की जाए तो 
 
 

                                                                        मुरैना से गौरीशंकर एवं पटवारी अभिमत डेस्क 
 

गिरदावरी पहले एप में करना। फिर कंप्यूटर खसरे में करना और फिर कंप्यूटर में करना। एक काम को तीन बार करना, फिर कहते हैं कि पटवारी काम नहीं करता। क्या ये मानव श्रम का दुरूपयोग नहीं है? कृपया इस पर ध्यान दें. कोई एक व्यवस्था हो, जिस पर अमल किया जा सके। नहीं तो अन्य योजनाओं की तरह यह भी फेल हो जाएगा. जैसे शिक्षकों ने मोबाइल पर उपस्थति को माननीय कोर्ट से स्थगित करवाया है।

 

 

गिरदावली ऐप में आने वाली तकनीकी समस्याऐं-
1. संसाधनों (मोबाइल एवं इंटरनेट) की कमी
2. स्टाफ की कमी (एक एक पटवारी पर 4 से 8 हलकों तथा 12 से 20 तक राजस्व ग्राम तक के अतिरिक्त प्रभार होना।
3. खसरा खतौनी की हार्डकॉपी का प्रतिवर्ष उपलव्ध न होना।
4. फसल गश्त और फसल फीडिंग की प्रक्रिया में भिन्नता होना। 
5. भू-अभिलेख नियमावली के प्रतिकूल।
6. फसल फीडिंग में दीर्घकालीन प्रोसिस।
7. फसल फीडिंग में बल्क अपलोड की व्यवस्था का अभाव।
8. सिचाई की वेकल्पिक सुविधा का अभाव।
9. मल्टीपल फसल इंट्री का अभाव।
10 गैर खाते का ओप्शन नहीं दिया गया है।
11. अत्यधिक वर्कलोड होने से पटवारी मानसिक तनाव 
में हैं। 
 ऐसे खातेदार कृषक जिनके 5 से अधिक खसरा नंबर हैं, पर एप कार्य नहीं कर रहा है।
13. खरीफ गिरदावरी का समय मौसम के प्रतिकूल है सर्वाधिक वर्षा काल माह अगस्त है, ऐसे में यह कार्य विभिन्न विषम परिस्थितियों से जटिल है।
14. क्षेत्र अनुसार फसल कस्टमाइज करने की सुविधा नहीं है।
15. Otp शत् प्रतिशत कारगर नहीं हो पा रहा है।
15. फसल जोडने में त्रुटि या अपूर्ण होने पर ऐडिट करने का विकल्प नहीं है।
16. किसान स्वप्रेरणा से otp की जानकारी नहीं देते हैं।
17. यदि किसान से otp पूछा जाता है तो वह पहले पूर्व से उस समय दर्ज फसलों या रकवा से संतुष्ट नहीं है, जिसे वह पहले सुधार कराना कहता है जो कि एप  में उसे सुधार करके पुनः अपलोड करने की व्यवस्था नहीं है।
18. गिरदावरी एप  हेतु उपलब्ध डाटा अप टू डेट नहीं है।
19. एप आधारित गिरदावरी मूल डाटा में मर्ज करने की अभी कोई व्यवस्था न होने किसान व पटवारी दोनों परेशान हो रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार संसाधन उपलब्ध कराये बगैर कुछ भी काम कराना चाह रही है, वह केवल दिखावे का कार्य कर रही है। कोई भी योजनाओं में करोडों खर्च करने वाली सरकार किसानों के काम को गंभीरता से नहीं ले रही है. पटवारियों को कोई संसाधन ही उपलब्ध नहीं कराये जायेंगे तो वह कैसे काम करेंगे?
पटवारी वर्ग का कहना है कि भू अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण करना ऑनलाइन प्रक्रिया करने के हम पटवारी भी पक्षधर हैं, लेकिन ठीक से व्यवस्था की जाए तो