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फिर न कोई 'उदय' रहेगा, न रहेगा कोई अभियान

PUBLISHED : Sep 11 , 6:33 PM

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आप पटवारी हैं..

 
 
फिर न कोई 'उदय' रहेगा,
 
 
न रहेगा कोई अभियान,
 
 
हिटलर सरीखे तानाशाह, सोये रह जाते हैं....

 
एक आम पटवारी की व्यथा, एक आम पटवारी का दर्द, 
 
व्यावहारिक समस्याओं को प्रस्तुत करती रचना
 
     @ यतेन्द्र सिंह सिकरवार, पटवारी जी, मुरैना
      
पटवारी पर शासन-प्रशासन के भयंकर दवाब
 
अधिकारों की बात मत करिये, आप पटवारी हैं,
संसाधन की चाह न रखिये, आप पटवारी हैं|
जरूरत ही नहीं तुम्हें वेतन की,मुश्किल से घबराना क्या
हर आदेश का पालन करिये, आप पटवारी हैं,
अधिकारों की बात न करिये, आप पटवारी हैं|

पटवारी होकर भी क्या तुमको लाचारी है,
थकना  भी मना है, ऐसी  क्या बीमारी है|
ये भी कर लो वह भी कर लो,कहते अधिकारी हैं,
नियमावली एल.आर.सी. के अधीन, आप पटवारी हैं|

सुविधाओं का मोह न रखिये, आप पटवारी हैं|
अधिकारों की बात न करिये,आप पटवारी हैं|

सारे लोग साफ स्वच्छ हैं , भ्रष्ट सभी पटवारी हैं
उपेक्षित हैं  नजरों में सबकी,फैलीं मारामारी हैं|
पहले उपलब्ध कराइये हर साधन जो जरूरी हैं,
फिर इतराये,आंख दिखायें, कितने वो अधिकारी हैं|

काहे की चिंता है, अच्छा! नये पटवारी हैं|
हर हाल में काम कीजिए, आप पटवारी हैं|
अधिकारों की बात न करिये, आप पटवारी हैं|
हर आदेश का पालन करिये, आप पटवारी हैं|

संसाधनों की अनुपलब्धता
 
बगैर शस्त्र के युद्ध कोई योद्धा जो लड़ता है;
दुश्मन के आगे भला ! दिन कितने वो टिकता है|
उसका सपना है विजय श्री वरण कर लेने का;
मगर निहत्था होकर साहस ,कहीं भला टिक पाता है|

तो श्रीमान्!  पटवारी निहत्था है, मजबूर है;
अपनी क्षमता से ज्यादा सहता, मजदूर है|
उसका कोई प्रमोशन नहीं,अंधियारे में आशायें हैं;
जीता-मरता बदनामी लेकर, पटवारी! सम्मान से दूर है|

बगैर संसाधन के पटवारी कब तलक काम कर पाएगा?
घनघोर उपेक्षित होकर वजूद सुरक्षित रख पाएगा?
रहा हो किसी जमाने में 'लाट साब',मगर आज तृण मात्र है!
उपेक्षित रहकर भला कब तलक अपेक्षा पूर्ण कर पाएगा?

आघात प्रतिघात भला कब तलक सह पाएगा?
दे देकर प्रतिवेदन प्रमाणीकरण ,खुद ही प्रतिवेदन  हो जाएगा?

सब काम करे फिर भी वह बेबस, झेले लाचारी है|
दे देकर प्रमाणीकरण अनेकों,  सदमे में पटवारी है|


शासन का उदासीन रवैया
 
तो संसाधन उपलब्ध कराना,किसकी जिम्मेदारी है;
यह हमारी आवश्यकता नहीं,राज्य हित में जरूरी है|
क्या अड़चन हैं,क्या कमी हैं, खुल कर कह दे सरकार;
मगर हमें तिरस्कृत करना,भी कोई मजबूरी है?

सार्वजनिक मंचों से कहते,आप भ्रष्टाचारी हैं|
अधिकारों की बात न करिये, आप पटवारी हैं|

शासन-प्रशासन से निवेदन हम भी पढ़ लिखकर आए हैं, अपील स्वरूप
 
हम भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करते हैं;
'जो करेगा,वही भरेगा' में विश्वास रखते हैं|
दो रोटी सांझ को कम खाकर सोने वाले हैं;
मगर अपनी मेहनत पर ही आस करते हैं|

समय सबको उनकी औकात बता ही देता है
वो दौर भी आता है, जब कागजी फरमान धरे रह जाते हैं;
अच्छे अच्छों के अरमान् अधूरे रह जाते हैं|
फिर न कोई 'उदय' रहेगा, न रहेगा कोई अभियान,
हिटलर सरीखे तानाशाह, सोये रह जाते हैं|

'धेला....न देंगे', आप पटवारी हैं|
अरे कैसी बात करते हैं, आप पटवारी हैं!!

अगर आप व्यवस्थित तंत्र स्थापित कर दें 
तो हम भी विकास के पक्षधर हैं, कंधे से कंधा मिलाकर चलें !
तकनीक हमें भी पसंद है, उपबंध तो कीजिये,
हम उत्तरदायित्व निभाएंगे, समुचित प्रबंध तो कीजिये|
उम्मीद पर खरा न उतरें तो, भले 'नाकारा' घोषित कर दें;
मगर फटेहाल हमको,  बेशर्म की उपमा न दीजिये|

सिस्टम डेवलप तो करिए, फिर पूछें, आप पटवारी हैं!
फिर हक से कहिए,  हां!  आप पटवारी हैं|

मानसिक व्यथा, मन की बात
 
अनुसंधान हमें पसंद हैं, मगर कोई रणनीति तो हो;
कंप्यूटर से परहेज नहीं,मगर कोई नीति तो हो|
आधुनिकता के वेश में, पुरातन जो सोचते हो;
भयंकर रिक्तता के बावजूद, हर हलके में पटवारी खोजते हो|

गर अपनी बात भी रखें, तो निलंबन का भय है;
पल पल की उपेक्षा, अपमान का भय है|
यूं ही लदे हैं असीमित बोझ तले;
छोटी सी चूक पर, निपटने का भय है|

कहते,,   आप ड्यूटी नहीं करते,करे मक्कारी हैं|
चुप ही रहिए अब, आप पटवारी हैं|

अंतिम पंक्तियां, आक्रोश व्यक्त करती हैं
हमने कभी न मांगा, न हमें ऐरोप्लेन दीजिये;
पर जो काम करवा रहे हैं, वो साधन तो दीजिये|
बंगला ऑफिस वेतन भत्ता तो 'दूर के ढोल' ठहरे,
पर हर हलके में पटवारी नियुक्त तो कीजिये|
फिर कहना, आप पटवारी हैं| जिम्मेदारी आपकी है,आप पटवारी हैं|

अपनी जरूरतों को मांगते, हम पटवारी हैं;
मद में चूर हैं उन्हें जगाते, हम पटवारी हैं|
बहुत दिखाते हो भय हमको, निलंबन व नोटिस का;
पर सुन लो आप अधिकारी, हम पटवारी हैं|

हम पटवारी हैं, आप साहब अधिकारी हैं;
वैसे नौकर तुम भी सरकारी, हम भी सरकारी हैं|
आप थोड़े बड़े हो, हम छोटे कर्मचारी हैं.
अपने अधिकारों को मांगते, हम पटवारी हैं|