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तस्वीर बदलने में कौन कर सकता है कितना योगदान?

PUBLISHED : Aug 15 , 10:07 AM

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तस्वीर बदलने में कौन कर सकता है

 

 

 

कितना योगदान?

 

आजादी के ७० साल बाद भी यह भयानक तस्वीर है तो इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण अज्ञानता है

 

और इसके लिए सबसे प्रमुख जिम्मेदार हमारी राजनीति है. राजनीति में किस कदर का घटियापन है,

 

यह बताने की जरूरत नहीं है, सब ही खूब अच्छे से जानते हैं.

 

खैर मैं इस मामले में राजनीति के गलत लोगों को माफ़ इसलिए करता हूँ कि

 

वह भी इंसान हैं और अज्ञानता के कारण गलत हैं. उन्हें पता ही नहीं कि वह क्या कर रहे हैं

 

और क्या करना चाहिए? 

 

कैसे हो? पूछा और उन्होंने पहले ही कह दिया, सब बढिया? 
हमने भी कह दिया, सब बढ़िया .... बस यही सब चल रहा है. कौन कितना बढ़िया है, यह हम सब अच्छे से जानते हैं. मिलना और मिलने पर एक दुसरे की कुशलक्षेम पूछना रस्म अदायगी बन कर रह गया है. 
"सुख के सब साथी दुःख में न कोई...." 
बस एक ढर्रा है उस पर चलते रहिये. इससे हटेंगे तो समाज सामने खडा हो जाएगा. कोई क्या कहेगा सोचो और बक्सर के डीएम मुकेश पांडेय की तरह सोसाइड कर लो. लोग तब भी कहेंगे बहुत अच्छा आदमी था, गलती किया और भी कई रस्ते थे. खैर ...
हर व्यक्ति यहाँ सुख और शान्ति से रहना चाहता है, ऐसा होना भी चाहिए, पर ऐसा हो क्यों नहीं रहा, जब सब ऐसा चाहते हैं? 
मेरा मानना है कि इसके लिए हमारे अन्दर सबसे प्रमुख कमी है तो ज्ञान की है. यही वह कारण है कि कोई अज्ञानता के चलते दिन रात लगकर पैसा कमा रहा है. इतना अधिक कमा रहा है कि रात में मशीन से गिन रहा है, सो भी नहीं पा रहा तो कोई दूसरा रोटी के बजाय दारू पीकर पडा है. एक वर्ग ओव्हर डोज से बदहजमी का शिकार है तो एक बड़ा वर्ग भूंख से मर रहा है. 
आजादी के ७० साल बाद भी यह भयानक तस्वीर है तो इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण अज्ञानता है और इसके लिए सबसे प्रमुख जिम्मेदार हमारी राजनीति है. राजनीति में किस कदर का घटियापन है, यह बताने की जरूरत नहीं है, सब ही खूब अच्छे से जानते हैं. खैर मैं इस मामले में राजनीति के गलत लोगों को माफ़ इसलिए करता हूँ कि वह भी इंसान हैं और अज्ञानता के कारण गलत हैं. उन्हें पता ही नहीं कि वह क्या कर रहे हैं और क्या करना चाहिए? 
कहा जाता है जनतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जन की होती है, पर आज ऐसा नहीं है. कुर्सी एक बड़ी ताकत हो गयी है. एक बार जो काबिज हो गया, सो हो गया, तर गयी उसकी ७० पीढी. पर ऐसा नहीं है. वह लोग भी एक प्रकार के मकडजाल में हैं. 
असल में आतंकवाद, जातिवाद, भ्रष्टाचार, गरीबी आदि जितनी भी समस्याएं हैं, उनके लिए हम सब बराबर के जिम्मेदार हैं. राजनीति में गंदे और दलाल किस्म के लोग हर जगह काबिज हैं. तो उसके लिए वो कथित लोग जिम्मेदार हैं, जो स्वयं को इमानदार प्रदर्शित करने के लिए राजनीति को गंदी कह कर उससे दूर हैं. यह सही है कि राजनीति उतनी सरल नहीं, जितनी कि मैं यहाँ बताना छह रहा हूँ, लेकिन सवाल यह भी है कि उसे सरल बनाएगा कौन? वहां भी कोई अलग ग्रह से आये लोग तो नहीं हैं. 
कोई शक नहीं आज देश की आम जनता अभिमन्यु सी घिरी हुयी है. आजादी को झूंठा और केवल सता परिवर्तन बताने से कुछ नहीं होगा. देश की समस्याओं से लड़ने की जिम्मेदारी हम सबकी बराबर है.
मन्दिर से निकलो, मस्जिद से निकलो. हम सब का जन्म किसी विशेष कार्य के लिए हुआ हैअपना जीवन सार्थकबनाओ. हमे बस इतना ही करना है कि हम जिस भी जिम्मेदारी पर हैं, या जो जिम्मेवारियां हमे मिली हैं उन्हें नि:स्वार्थ भाव से निभायें. घर परिवार से समाज तक देश तक. किसी दुसरे को दोष भर देने से काम नहीं चलेगा. तस्वीर बदलने में आपका भी योगदान होना चाहिए. 
सरकार के अंग राजनेता अपने में बड़ी शक्ति हैं. वह चाहें तो स्थिति जल्दी सुधर सकती है. राजनीति गंदी नहीं है, उसमें बैठे लोग ज्ञान की कमी से अच्छा नहीं सोच पा रहे. राजनीति में भी अच्छे लोग बहुत हैं. उन्हें बस इतना करना चाहिए कि सच का साथ दें. गलत लोगों से बचें. सोच लें सब यहीं रह जाएगा. केवल शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान देकर ऐसा बखूबी किया जा सकता है. 
और अंत में 
हमारे पास एक ऐसा दोस्त जरूर होना चाहिए, जो सही राह दिखाए. सुख और दुःख इसी के इर्द गिर्द हैं. 
 
                                                                                                                          - मुकुट सक्सेना