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शिक्षक की भूमिका में सरकारी स्कूल पहुँचे मुख्यमंत्री श्री चौहान

PUBLISHED : Aug 26 , 9:41 PM

 

 

 

 

 

 

 

 

मिल बाँचे मध्यप्रदेश अभियान

 

 

 

 

 

शिक्षक की भूमिका में सरकारी स्कूल पहुँचे

 

 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी

 

 

बच्चों को किस्से-कहानियों में बताये जीवन में सफलता के सूत्र 

 

बच्चों को पढ़ाने स्कूलों में पहुँचे 2 लाख 15 हजार प्रबुद्धजन

 

- अजय वर्मा

भोपाल : शनिवार, अगस्त 26/ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मिल बांचे मध्यप्रदेश अभियान के अन्तर्ग्रत आज शिक्षक के रूप में भोपाल में मैनिट परिसर में स्थित शासकीय माध्यमिक शाला में बच्चों को पढ़ाने पहुँचे। श्री चौहान ने किस्से-कहानियों के माध्यम से बच्चों को जीवन में सफलता के सूत्रों का ज्ञान दिया। प्रदेश में आज दो लाख 15 हजार से भी अधिक प्रबुद्धजनों ने विभिन्न शासकीय विद्यालयों में जाकर बच्चों को पढ़ाने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के स्कूली बच्चों के साथ अत्यंत सरल और प्रभावशाली संवाद किया। बच्चों को अच्छे काम करने के लिये प्रेरित करते हुये श्री चौहान ने कहा कि उन्ही लोगों का जीवन सफल है जो स्वयं के साथ देश और समाज की उन्नति में भी सहयोगी हों। मुख्यमंत्री ने बच्चों को समझाया कि पुस्तकों से मिलने वाले ज्ञान को आचरण में उतारना चाहिये। छोटी-छोटी अच्छी आदतें ही व्यक्ति को महान बनाती हैं। श्री चौहान ने बच्चों को बड़ों का सम्मान करने, सदैव सच बोलने, स्वच्छता का पालन करने और पौधरोपण करने के लिये प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम करने के साथ ही खेलने और मित्रों के साथ समय व्यतीत करना भी जरूरी होता है। ऐसा करने से मन प्रसन्न, शरीर स्वस्थ और दिमाग मजबूत होता है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को अच्छे अंक लाने के लिये प्रोत्साहित करते हुए बताया कि 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले बच्चों की स्नातक स्तर की शिक्षा के लिये अब फीस सरकार द्वारा भरवायी जायेगी।  

प्रश्नोत्तरी में समझाया पर्यावरण संतुलन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रश्नोत्तरी शैली में बच्चों को जीवन के लिए जरूरी ऑक्सीजन की आवश्यकता, उसकी आपूर्ति के स्त्रोत, वृक्षों की अंधाधुंध कटाई एवं प्रदूषण के दुष्प्रभावों को समझाते हुये बताया कि तेजी से बढ़ता तापमान प्राकृतिक आपदाओं का जनक है। यदि वृक्षों को काटना और जल स्त्रोतों का प्रदूषण रोका नहीं गया तो मानव जीवन संकट में पड़ जायेगा। उन्होंने मौसमी बीमारियों के लिये आस-पास साफ-सफाई रखने और गंदगी नहीं करने की शिक्षा दी।

रोचक एवं प्रेरणादायी किस्से-कहानियाँ सुनाईं

मुख्यमंत्री ने कक्षा में बच्चों को पक्षी और बहेलिये की, सत्यवादी युधिष्ठिर और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रेरक प्रंसगों की कहानियां सुनाईं। बच्चों से पुस्तकों का वाचन करवाया और गणित के प्रश्न भी हल करवाये। श्री चौहान ने बच्चों को उपहार भेंट कर प्रोत्साहित किया तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये संकल्पित भी करवाया। मुख्यमंत्री ने विद्यालय की स्मार्ट क्लास का अवलोकन किया और विद्यालय प्रांगण में पौधा रोपित किया।

शिक्षक की आदर्श भूमिका में मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मिल बाँचे मध्यप्रदेश अभियान के तहत शाला में शिक्षक की आदर्श भूमिका प्रस्तुत की। बच्चों के साथ घुलमिल कर संवाद का ऐसा जीवंत सम्पर्क बना लिया कि उनके बुलाने पर बच्चे दौड़कर उनके पास आने लगे। श्री चौहान ने कक्षा आठवीं की पाठ्य पुस्तक 'भाषा भारती' के पाठ 'मुक्तानंद जी' का वाचन कक्षा 8 के छात्र अमित कुशवाह से करवाया। 'समय बड़ा अनमोल' पाठ का वाचन कक्षा चार की छात्रा राधिका ने किया। पहली कक्षा के छात्र कृष ने बाल सुलभ सहजता और शालीनता के साथ कविता 'जिसने सूरज चाँद बनाया' का पाठ किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के गणितीय ज्ञान का अत्यंत स्वाभाविक शैली में परीक्षण किया। पहले दो अंकों की संख्या का योग छात्रा आयुषी से करवाया। फिर तीन-तीन अंकों की संख्याओं का योग 5 वीं कक्षा की छात्रा दीप्ति से करवाया। इसके बाद चार-चार अंकों की संख्या घटवाकर देखी। इस प्रश्न को सफलतापूर्वक कक्षा 8 के छात्र अक्षय ने कर दिखाया। उन्होंने विद्यालय की छात्र मंत्री पर्यावरण शालिनी और कनक से अपनत्व और स्नेह के साथ बातें की।

थैंक्यू मामाजी

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की बच्चों के बीच अपनत्व और स्नेह की बानगी कार्यक्रम में दिखाई दी। मुख्यमंत्री जब बच्चों को उपहार में पुस्तकें भेंट करते, तब बच्चे बेझिझक थैंक्यू मामाजी कहते थे। ऐसे ही वे जब मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के संबंध में बता रहे थे, तब उन्होंने बच्चों से पूछा कि यदि मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज की फीस के लिए घर में पैसे नहीं होंगे तब फीस कौन भरवाएगा। उनके इस प्रश्न का उत्तर पूरी कक्षा ने सामूहिक रूप से एक स्वर में दिया, 'शिवराज मामाजी'!