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राजस्व अधिकारी दायित्वों के प्रति गंभीरता बरतें – मुख्य सचिव श्री सिंह

PUBLISHED : Feb 16 , 10:19 PM

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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    राजस्व अधिकारी दायित्वों के प्रति गंभीरता

     

      

    बरतें – मुख्य सचिव श्री सिंह

     


    जबलपुर संभाग के राजस्व अधिकारियों की बैठक सम्पन्न


    जबलपुर 16 फरवरी
     मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह ने कहा कि राजस्व विभाग के व्यापक कार्य-क्षेत्र के मद्देनजर राजस्व अधिकारियों से अपेक्षित है कि वे अपने दायित्वों के प्रति पूरी गंभीरता बरतें। उन्होंने कहा कि राजस्व अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर भू-राजस्व न्यायालयों का नया ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। आवश्यक संशोधनों से राजस्व न्यायालयों का काम-काज अधिक आसान बनेगा। मुख्य सचिव ने माना कि जबलपुर संभाग में बड़ी हद तक राजस्व से जुड़ी व्यवस्थाएं बेहतर हैं और संभाग को प्रदेश के बेहतर परफॉर्मेंस वाले संभागों में गिना जाता है। 


    श्री सिंह आज यहां संभाग स्तरीय बैठक में विभिन्न जिलों के राजस्व अधिकारियों के काम-काज की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न जिलों में अविवादित नामान्तरण, बंटवारा तथा सीमांकन के प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की। उन्होंने आरसीएमएस में दर्ज आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरसीएमएस में ठीक प्रकार से एन्ट्री नहीं हो रही है। इस सिलसिले में उन्होंने कलेक्टर्स से कैफियत तलब की। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालयों में प्रकरण के निराकरण में असाधारण विलम्ब के मामलों में सम्बन्धित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कई प्रकरण केवल इसलिए लम्बे समय तक लम्बित रहते हैं क्योंकि अधीनस्थ न्यायालय से अपेक्षित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाता। श्री सिंह ने ऐसे मामलों की समीक्षा करते हुए सम्बन्धित जिलों के कलेक्टर्स और अनुविभागीय अधिकारियों से जवाब तलब भी किया। 


    उन्होंने आगाह किया कि पटवारियों द्वारा नामान्तरण पंजियां लम्बे समय तक जमा न कराने की प्रवृत्ति नितांत अवांछनीय है और ऐसे मामलों में सम्बन्धित के विरूद्ध कार्यवाही की जानी चाहिए। श्री सिंह ने संभाग के विभिन्न जिलों में अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण के बारे में भी समीक्षा की। मुख्य सचिव ने साफ तौर पर कहा कि पालन-प्रतिवेदन अप्राप्त होने की स्थिति में ऐसे निरीक्षण की उपादेयता शून्य है। इस सिलसिले में उन्होंने छिंदवाड़ा और बालाघाट के कलेक्टरों से अप्रसन्नता व्यक्त की। पटवारी बस्तों के निरीक्षण की भी समीक्षा की गई। श्री सिंह ने बैठक में मौजूद कलेक्टर्स से वसूली की स्थिति, गिरदावरी, ओला-वृष्टि एवं बेमौसम बारिश तथा जनसुनवाई की बाबत् ब्यौरा तलब किया। मुख्य सचिव ने नाकारा अधिकारियों को 20 वर्ष की सेवा अथवा 50 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त किए जाने सम्बन्धी प्रावधानों को अमल में लाने की जरूरत बताई।


    श्री सिंह ने बालाघाट जिले के बैहर अनुभाग के दो नायब तहसीलदार न्यायालयों में शून्य प्रकरण दर्ज और निराकृत दर्शाए जाने को लेकर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए सम्बन्धित अनुविभागीय अधिकारी को इस सम्बन्ध में ध्यान देने की हिदायत दी। विभिन्न जिलों के राजस्व न्यायालयों में अदम पैरवी खारिज किए जाने के सिलसिले में मुख्य सचिव ने कहा कि अदम पैरवी को केवल निराकरण दर्शाने के लिए खारिज किया जाना वांछनीय नहीं है। उन्होंने सचेत किया कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। 


    बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व अरूण पाण्डेय ने निर्देश दिए कि प्राकृतिक आपदा में राहत के लम्बित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित कर राहत राशि वितरित की जाए। उन्होंने आगाह किया कि वरिष्ठ अधिकारी इस काम को गंभीरता से लें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र व्यक्ति बिना राहत राशि के न रहे और न ही किसी अपात्र को राशि प्राप्त हो। उन्होंने मोबाइल गिरदावरी के बारे में भी जिलेवार समीक्षा की। 


    प्रमुख सचिव राजस्व हरिरंजन राव ने राजस्व प्रशासन में नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में मूल प्रकरण नस्ती के स्थान पर डिजिटली सिग्नेचर्ड रिकॉर्ड की अनुमति होगी। इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर मुहर लगाकर भेजी गई तामीली भी विधि मान्य होगी। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालयों में रिकॉर्ड रूम व कॉपी कक्ष का एकीकरण किया जाएगा। राजस्व सम्बन्धी अभिलेखों की प्रति की पिं्रटेड हार्ड कापी व इलेक्ट्रॉनिक प्रति की निश्चित दर होगी और शुल्क का सरलीकरण किया जाएगा। उन्होंने पटवारी और राजस्व निरीक्षकों के प्रशिक्षण की तैयारियों का भी ब्यौरा दिया। बैठक के दौरान आवासीय पट्टों के वितरण की बाबत् श्री राव ने विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पट्टों का रिकॉर्ड रखे जाने की हिदायत दी। साथ ही संभाग के विभिन्न जिलों में डायवर्जन, नजूल, अर्थदण्ड एवं अन्य वसूलियों के सम्बन्ध में समीक्षा की। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व एवं प्रमुख राजस्व आयुक्त मनीष रस्तोगी भी मौजूद थे। 


    आयुक्त भू-अभिलेख एम.सेल्वेन्द्रम् ने बताया कि आरसीएमएस के सिलसिले में नवाचार की पहल की गई है जिसके चलते न केवल नामान्तरण आसान होगा बल्कि खातों और खसरों की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। आरसीएमएस को भू-अभिलेख के एप्लीकेशन के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था से अविवादित नामान्तरण और बंटवारे की मॉनीटरिंग का काम आसान होगा। श्री सेल्वेन्द्रम् ने आधुनिक राजस्व रिकॉर्ड रूम के सम्बन्ध में भी जानकारी दी। 


    कमिश्नर गुलशन बामरा ने संभाग के विभिन्न जिलों में आरसीएमएस में दर्ज व निराकृत प्रकरणों की जानकारी दी। साथ ही त्वरित निराकरण के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा दिया। श्री बामरा ने विभिन्न जिलों में सीमांकन प्रकरणों के निराकरण की स्थिति पर भी प्रकाश डाला। 


    बैठक में लोक सेवा गारंटी के अन्तर्गत प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण किए जाने पर जोर दिया गया। साथ ही सीएम हैल्पलाइन के प्रकरणों के निराकरण की भी समीक्षा की गई। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट तथा अन्य न्यायालयों में अवमानना प्रकरणों के मामलों में समय से जवाब-दावा दाखिल किए जाने के निर्देश दिए गए। 
    बैठक के अन्त में जबलपुर कलेक्टर महेशचन्द्र चौधरी तथा अन्य जिलों के कलेक्टर्स ने अपने जिलों से सम्बन्धित राजस्व, जनसुनवाई, सीएम हैल्पलाइन तथा लोक सेवा गारंटी के प्रकरणों के निराकरण सम्बन्धी ब्यौरा प्रस्तुत किया। कलेक्टर्स ने अपने जिलों में किए गए नवाचारों से भी मुख्य सचिव को अवगत कराया। साथ ही राजस्व प्रशासन में प्रस्तावित परिवर्तन के सिलसिले में भी अपनी राय व्यक्त की। विभिन्न जिलों के प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारियों ने भी वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी जिज्ञासाएं रखीं जिनका समाधान किया गया। 


    बैठक में संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर, अपर कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और नायब तहसीलदार उपस्थित थे।