पटवारी आवेदन की तारीख बड़ी अब 15 तक कर सकेंगे आवेदन    |    चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संवर्ग का वेतनमान अब 5200-20200-1700 होगा, आदेश जारी    |    लिपिक वर्गीय कर्मचारियों की बल्ले बल्ले, पदनाम परिवर्तित, ग्रेड पे बढ़ा    |    पटवारी भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण तथ्य 2    |    पटवारियों की बम्फर भर्ती प्रक्रिया शुरू, कल से भरे जा सकेंगे ऑनलाइन फ़ार्म    |    कलेक्टर डॉ. सुदाम खाडे ने समस्याएं निराकृत करने दिए निर्देश    |    अपर कलेक्टर श्रीमती दिशा प्रणय नागवंशी द्वारा ग्राम बरखेडा बोंदर और परवलिया सड़क का भ्रमण    |    संविदा पर भर्ती से तहसीलदार जैसे एक महत्वपूर्ण पद की महत्ता कम होगी : मुकुट सक्सेना     |    स्थानांतरित पटवारी तत्काल कार्यभार ग्रहण करें, वरना होगी सख्त कार्यवाही - कलेक्टर डॉ. खाडे     |    पटवारी जी कृपया नामांतरण ग्राम पंचायत में ही प्रमाणित करवाएं    |    

अपना -अपना कर्म

PUBLISHED : Nov 12 , 2:26 PM

 

अपना -अपना कर्म 

- संजय शर्मा, भोपाल 

 

आज एक मित्र से बहुत कुछ सीखने को मिला ,

सुबह घूमने जाता हूँ , कुछ मित्र इकठ्ठा होकर गपशप और walk कर लेते हैं ,

मेने देखा वो रोज़ सुबह आटे की बड़ी सी लोई लाते हैं ,

जिसे तीनो चारों मित्र बाँट कर तालाब के किनारे मछलियों को डालते हैं ,

जहाँ उनको दाना डाला जाता है ,

उससे कुछ 200-300 फ़ीट की दूरी पर मछली मारने वाला बैठा रहता है ,

एक तरफ जीवन दूसरी तरफ मृत्यु , अलग ही दृश्य था ,

मुझसे रहा नहीं गया ,मेने कहा इसको भगाते हैं यहाँ से ,

तो मेरे मित्र ने कहा नहीं ,हम अपना कर्म कर रहे हैं वो अपना कर्म कर रहा है ,

हो सकता उसका जीवन यापन इसी से होता हो !

हम मछलियों को खिला रहे हैं यह हमारा कर्म है वो मार रहा है यह उसका कर्म है ,,,

यह क्या कम है कि मृत्यु से पहले वो मछलियाँ तृप्त अवस्था में हैं ,

कोई भी व्यक्ति या प्राणी अपना मूल स्वभाव तो कभी नहीं छोड़ सकता ,

चाहे वो कोई क्यों ना हो , आज यहाँ से भगा देंगे कल वो दूसरी जगह मछली पकड़ेगा ,

मुझे साधू और बिच्छू की कथा याद आ गयी

कैसे वो साधू उसे बार बार पानी से निकालने की कोशिश करते थे

और वो बिच्छू बार बार उनके हाथ में डंक मार देता था ,

जब उनसे किसी ने पूछा कि आप उसे पानी में ही क्यों नहीं छोड़ देते ,

तब साधू बोले डंक मारना बिच्छू का मूल स्वभाव है ,

परोपकार करना साधू का मूल स्वभाव ,

जब वो अपनी आदत नहीं बदल सकता तो में क्यों बदल जाऊं ,

,,,और में सोच रहा था कि

छोटी छोटी बातें कई बार कितना कुछ सीखा जातीं हैं ...