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सौर ऊर्जा से रोशन होने वाला प्रदेश का पहला कलेक्ट्रेट

PUBLISHED : Jul 14 , 8:52 PM

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सौर ऊर्जा से रोशन होने वाला

 

प्रदेश का पहला कलेक्ट्रेट

 

बालाघाट कलेक्ट्रेट भवन में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना,

 

विद्युत ग्रिड से हुआ संयोजन

 

वर्तमान में पूरे कलेक्टर कार्यालय का बिजली का खर्च लगभग 70 से 75 हजार रूपये प्रतिमाह आता था, वह सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के उपरांत 80 से 90 प्रतिशत तक कम हो जायेगा। इस प्रकार जहां पर राजस्व की बचत होगी, वहीं पर्यावरण की रक्षा में भी मदद मिलेगी। 

बालाघाट. बालाघाट का कलेक्ट्रेट भवन सौर ऊर्जा से रोशन होने वाला प्रदेश का कलेक्ट्रेट भवन बना गया है। बालाघाट के कलेक्ट्रेट भवन में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना कर उसे विद्युत ग्रिड से जोड़ दिया गया है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे कलेक्ट्रेट भवन में लगने वाले कार्यालयों का नियमित रूप से बिजली मिलती रहेगी और उनका बिजली बिल का खर्च भी बहुत कम हो जायेगा।

जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी श्री पी के जैन ने बताया कि बालाघाट के कलेक्ट्रेट भवन में 50 किलोवाट क्षमता के दो सौर प्रकाश संयंत्रों की स्थापना का कार्य पूर्ण हो गया है और यह प्रदेश का पहला कलेक्ट्रेट भवन बन गया है जहां पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना कर उनका संयोजन विद्युत ग्रिड कर दिया गया है। कलेक्ट्रेट भवन में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना नेट मीटरिंग पद्धति से की गई है।
कलेक्ट्रेट भवन में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना होने से अब कलेक्ट्रेट में बिजली गुल होने पर काम प्रभावित होने की समस्या नहीं रहेगी। बिजली गुल होने की समस्या से निजात पाने के लिए कुछ कार्यालयों में जनरेटर की भी व्यवस्था करना पड़ता था। लेकिन सौर ऊर्जा संयंत्रों के प्रारंभ होने से कलेक्ट्रेट भवन में अब बिजली गुल होने और जनरेटर चालू करने का झंझट खत्म हो गया है।
वर्तमान में पूरे कलेक्टर कार्यालय का बिजली का खर्च लगभग 70 से 75 हजार रूपये प्रतिमाह आता था, वह सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के उपरांत 80 से 90 प्रतिशत तक कम हो जायेगा। इस प्रकार जहां पर राजस्व की बचत होगी, वहीं पर्यावरण की रक्षा में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही म.प्र. ऊर्जा विकास निगम के जिला कार्यालय बालाघाट द्वारा जिले के 40 अन्य शासकीय भवनों पर सौर प्रकाश संयंत्रों की स्थापना हेतु आवश्यक सर्वेक्षण कर प्रस्ताव निगम के प्रधान कार्यालय भोपाल प्रेषित कर दिये गये हैं, जिन पर आवश्यक कार्यवाही उपरांत संयंत्रों की स्थापना का कार्य शुरू कर दिया जायेगा।
म.प्र. शासन द्वारा जारी विकेन्द्रीयकृत नवकरणीय ऊर्जा नीति 2016 के अंतर्गत कोई भी उपभोक्ता नेट मीटरिंग पद्धति पर आधारित अपने भवन की छत पर या अन्य रिक्त स्थान पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगा सकता है। इसका सीधा लाभ उपभोक्ता के बिजली के बिल में मिलेगा। सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली को उपभोक्ता स्वयं उपयोग करेगा जिससे जहां पर विद्युत वितरण कंपनी से ली जा रही बिजली में सीधी कमी आयेगी, वहीं पर्यावरण की रक्षा भी होगी। अवकाश के दिनों में और कतिपय अन्य समय पर जब भी सौर ऊर्जा का उत्पादन उपभोक्ता की खपत से अधिक होगा तब अतिशेष ऊर्जा विद्युत वितरण कंपनी के ग्रिड में निर्यात् कर दी जायेगी जिसका समायोजन उपभोक्ता के बिजली बिल में किया जायेगा।
इसके अतिरिक्त ऐसे स्थल जहां पर वर्तमान में रात्रिकालीन समय में विद्युत की उपलब्धता की समस्या है, वहां पर बैटरी सहित ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि इन योजनाओं पर आकर्षक शासकीय अनुदान भी उपलब्ध हैं। योजना के क्रियान्वयन हेतु शासन द्वारा म.प्र. ऊर्जा विकास निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है जिसके माध्यम से हितग्राही अनुदानित कीमत पर संयंत्रों की स्थापना करवा सकते हैं। संयंत्र की स्थापना उपरांत तक 5 वर्षों तक निःशुल्क रखरखाव भी करवाया जाता है। योजना के आकर्षक लाभों को देखते हुए तथा साथ ही समय के साथ बिजली के मूल्यों की वृद्धि को देखते हुए जन सामान्य, शासकीय उपभोक्ता इत्यादि प्रकार के हितग्राहियों का रूझान इस योजना की तरफ बढ़ रहा है।
सौर संयंत्र एक ऐसी अर्द्धचालक युक्ति है, जो सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत में परिवर्तित करती है। अतः सौर संयंत्र पैनल या सौर संयंत्र मॉड्यूल सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आने पर वोल्टेज व करंट पैदा करता है। इस विद्युत धारा या वोल्टेज को हमारी विद्युत आवश्यकता के लिए उपयोग किया जा सकता है। इस विधि द्वारा पैदा की जाने वाली बिजली की मात्रा, उपलब्ध सूर्य के प्रकाश पर निर्भर करती है। सूर्य के प्रकाश की तीव्रता जितनी अधिक होगी, उतनी ही अधिक बिजली पैदा होगी।
मध्यप्रदेश राज्य में 300 से भी अधिक सूर्य प्रकाश दिवस होते हैं व प्रति दिवस प्रति वर्ग मीटर औसत 5.5 किलोवाट घंटे की दर से सौर विकिरण प्राप्त होता है। ऐसे में ’’मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा नीति, वर्ष 2012 के अंतर्गत राज्य में ग्रिड संयोजित सौर परियोजनाओं की स्थापना हेतु मुख्य जोर दिया गया है।
विगत् वर्षों में सौर प्रकाश संयंत्रों के अतिरिक्त और भी कई योजनाएं जैसे कि सोलर पंप, सौर गर्म जल संयंत्र, सौर पथ प्रकाश संयंत्र, ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम तथा शासन की उजाला एवं पवन योजना के माध्यम से ऊर्जा दक्ष एल.ई.डी. बल्ब, ट्यूबलाईट्स एवं पंखों के वितरण के कार्यक्रम जन उपयोगी साबित होने के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुए हैं। साथ ही उपयुक्त क्षेत्रों में पवन ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा, लघु जल विद्युत परियोजना के माध्यम से भी विद्युत का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त जिला स्तर एवं ब्लॉक स्तर पर संचालित अक्षय ऊर्जा शॉप्स के माध्यम से भी ऊर्जा दक्ष उपकरणों का विक्रय किया जा रहा है जिससे कि इन योजनाओं का लाभ दूरस्थ अचंलों तक पहुंच सके।