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उनके कदमों के निशां

PUBLISHED : Nov 09 , 9:53 PM

 

 

उनके कदमों के निशां 

 

अपने लिए तो कीड़े मकूड़े भी जी लेते है 
उनमे से कुछ अपने परिवार और वंशजो के लिए भी जीते है .
पर जिनका ध्येय ही सम्पूर्ण राष्ट्र और मानवता के लिए अपना जीवन कुर्बान करने का हो जाए, ओरों के लिए जो अपना सर्वस्व निछावर कर जाएँ..उन महान आत्माओं को ही इतिहास अपने पन्नों मे जगह देता है, ऐसी ही अनेक, महान आत्माओं के कारनामो से, हमारा अतीत जगमग करता दिखाई देता है, उनकी अनेक गौरवशाली गाथाएँ भी है, जो हमारा मस्तक गर्व से ऊंचा करने के लिए काफी है |

परंतु आज, कदम कदम पर हम जो देखते है, उनमें से बहुतेरे तो ऐसे है, जिनका उसूल होता है.  सिर्फ अपने लिए जियो, उनमें से कुछ होते है जो अपने परिवार की चिंता भी कर लेते है । पर ऐसे तो नगण्य ही मिल पाते है, जो ईमानदारी से, समाज के लिए जीने की लालसा रखते है .

तब ये ख्याल उठना लाज़मी है कि क्या वाकई मे हमारी रगों मेँ हमारे उन वंशजों का खून दौड़ रहा है, जिनके कदमों के निशां भी हमे रोमांचित कर देते है .
अतीत कितना भी गौरवशाली क्यों ना हो , पर वर्तमान की धरा पर ही भविष्य की बुनियाद तैयार होती है ,

तो आओ मिलकर अपनी बिरासत से सबक लेकर,
संस्कारो और उसूलों की बुनियाद पर सुनहरा कल लिखने का संकल्प लें ....

‘’ समय कभी नहीं बदलता, बदलते तो हम है, हमारे विचार ही कर्म बनकर, समय के पन्नों पर अंकित होते है, जिसे हम भविष्य कहते है |

               

    - महेन्द्र सिंह पटेल, नरसिंहपुर